"मिट्टी मन...मृगगन्ध सी महकी कविताएं " सुमन ठाकुर की अंतरात्मा से उपजा वह सृजन है, जो जीवन के छोटे-छोटे क्षणों में छिपे बड़े अर्थों को उजागर करता है। इस संग्रह की हर कविता, मिट्टी की तरह सोंधी, नर्म और जीवनदायिनी है। एक शिक्षिका, एक माँ और एक जिज्ञासु आत्मा की अनुभूतियाँ यहाँ शब्दों में ढलती हैं—कभी प्रेम बनकर, कभी तन्हाई, कभी प्रकृति की पुकार। अगर आपने कभी चुपचाप खुद से बातें की हों, तो ये कविताएँ आपके दिल की आवाज़ बन जाएँगी। ये सिर्फ पंक्तियाँ नहीं, वो एहसास हैं जो छूते नहीं—बस महसूस होते हैं।
मिट्टी मन
SKU: 978-93-7092-410-9
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