मैं घर लौटना नहीं चाहता अस्तित्व, स्मृति और आत्मबोध की कविताओं का संग्रह है। यह पुस्तक ‘घर’ को एक स्थान के बजाय एक विचार के रूप में देखती है—ऐसा विचार जिससे दूरी कभी-कभी आवश्यक हो जाती है। इन कविताओं में समय ठहरता है, प्रश्न स्पष्ट नहीं होते, और अर्थ धीरे-धीरे खुलते हैं। यह संग्रह उत्तर देने का दावा नहीं करता; यह पाठक को अपने भीतर उठते प्रश्नों के साथ ठहरने का अवसर देता है। यह उन क्षणों की कविता है जहाँ लौटना संभव तो होता है, पर अनिवार्य नहीं।
मैं घर लौटना नहीं चाहता
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