"मन बोल पड़ा – कुछ अनायास, कुछ सप्रयास" - रविन्द्र कुमार करनानी का पहला कविता-संग्रह है, जिसमें जीवन की कोमल भावनाएँ, रिश्तों की मिठास और समय की सादगी झलकती है। कुछ कविताएँ सहज रूप से उपजी हैं, कुछ गहन सोच से – लेकिन हर एक पाठक के दिल को छूने की शक्ति रखती हैं। यह संग्रह विशेष उन पाठकों के लिए है जो कविता में दिखावा नहीं, दिल ढूँढ़ते हैं।
मन बोल पड़ा
SKU: 9789372130225
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Author’s Name: रविन्द्र कुमार करनानी ‘रवि’
About the Author: "रविन्द्र कुमार करनानी, कोलकाता निवासी, 74 वर्ष की आयु में भी मन से युवा और भावनाओं से समृद्ध हैं। वे अपनी अनुभूतियों, स्मृतियों और जीवन के रंगों को कविता के रूप में शब्दों में ढालते हैं| वे स्वयं तो इनको तुकबंदियाँ ही कहते हैं | उनकी कविताएँ कभी सहज रूप से बह निकलती हैं, तो कभी किसी अवसर, विचार या व्यक्ति विशेष के अनुरोध पर रची जाती हैं। वे मानते हैं कि कविता आत्मा की भाषा है -जो कहे बिना भी बहुत कुछ कह जाती है।भाषाई अलंकारों के स्थान पर वे आम जीवन की सरल भाषा में दिल की बात कहते हैं। "
Book ISBN: 9789372130225
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