यह पुस्तक भावनाओं, अनुभवों और आत्मचिंतन की एक अनूठी यात्रा है।हर कविता जीवन के किसी न किसी क्षण से जन्मी है — कभी खुशियों की झिलमिलाहट में, तो कभी मन की नीरवता में।अंकिता मील ने अपनी लेखनी के माध्यम से उन भावों को स्वर दिया है, जिन्हें हम महसूस तो करते हैं, पर कह नहीं पाते।यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि मानव हृदय की गहराइयों का दस्तावेज़ है।इन कविताओं में प्रेम है, संघर्ष है, जीवन की थकान और उम्मीद दोनों हैं।कभी ये शब्द सांत्वना देते हैं, कभी आईना बनकर आत्मा से सवाल करते हैं।हर पंक्ति में सादगी है, पर भावों की शक्ति अद्भुत है।यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो शब्दों में संवेदना, जीवन में अर्थ और मौन में भी एक आवाज़ खोजते हैं।“यह पुस्तक पढ़ना, जैसे खुद के भीतर झाँकना।”
मन के आईने में
SKU: 9781807154745
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Author’s Name:
अंकिता मील
About the Author: अंकिता मील राजस्थान की शांत और सांस्कृतिक भूमि से संबंध रखती हैं। उन्होंने अपने जीवन को तर्क और संवेदना — दोनों के संग संतुलित किया है। एक सरकारी कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहते हुए भी, उन्होंने अपने भीतर के रचनात्मक स्वर को जीवित रखा। गणित की पढ़ाई ने जहाँ उनके विचारों को तार्किक बनाया, वहीं लेखन ने उन विचारों में भावनाओं की गर्माहट भर दी। यह उनकी पहली पुस्तक है, जो उनके भीतर की उस यात्रा का परिणाम है जहाँ शब्द, भावनाओं का आकार लेते हैं। अंकिता मानती हैं कि लेखन सिर्फ़ अभिव्यक्ति नहीं, मन की मुक्ति है — जहाँ हर कविता अपने पाठक के भीतर एक नई भावना जगाती है।
Book ISBN: 9781807154745
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