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Description of the Book:

 

यह कविता–संग्रह "बैठा बैठा कहीं गुमसुम" अनुभवों का एक संग्रह है। इस संग्रह के प्रथम सोलह अध्यायों को आप एक श्रृंखला के तौर पर देख सकते है। जब एक इंसान को किसी से इश्क़ हो जाता है तब वह किस किस भावों से गुजरता है, उसको मैंने शब्दों में बांँधने की कोशिश की है। सोलहवांँ अध्याय के आगे मेरे रोजमर्रा के कुछ अनुभव है, जैसे वो अनुभव जिसे मैंने मांँ से दूर रहकर जाना, जिसे मैंने फुटपाथ पर सोये इंसान को जीते देखा या जिसे मैंने बादलों को देखते देखते अनुभव किया, इत्यादि।

बैठा बैठा कहीं गुमसुम

SKU: 9789357690447
₹110.00Price
  • Author's Name: शशि रंजन शांडिल्य
    About the Author: शशि रंजन शांडिल्य वर्तमान में आई जी आई डी आर (मुंबई) में परास्नातक के छात्र है। इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। ये स्वयं को पेशेवर लेखक नहीं मानते है। ये प्रकृति प्रेमी है और प्रकृति को लंबे समय तक निहारना इनका शौक है। लोगों से मिलना, बातें करना व उनके अनुभव को सुनना इन्हें काफी पसंद है। किसी भी संवृति को गौर से अवलोकन करना इनकी रुचि में शुमार है। धीरे धीरे उन्होंने अपने अवलोकन को शब्द देना आरंभ कर दिया और लिखने में रुचि बढ़ती चली गई। बिहार के एक छोटे से गांव व एक छोटे से शहर से एक साथ ताल्लुक रखने वाले शशि अभी एक बड़े शहर, मुंबई, के परिवेश से परिचित हो रहे है। अपने ख्वाहिशों के संदर्भ में ये बताते है कि जीवन में इनको अपने द्वारा किए कार्यों से स्वयं को संतुष्टि चाहिए।

    Book ISBN: 9789357690447

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