“फिर भी चलती जाए ज़िंदगी” एक ऐसा काव्य-संग्रह है जिसमें जीवन के हर रंग समाए हुए हैं—कभी मुस्कुराहट, कभी आँसू, कभी सुकून, तो कभी बेचैनी। प्रवीन कुमार की ये कविताएँ साधारण अनुभवों से निकलकर गहरे जीवन-सत्य तक पहुँचती हैं। छोटे गाँव से लेकर बड़े शहर की चुनौतियों और संघर्षों तक का सफ़र इन पंक्तियों में झलकता है। कवि ने हर परिस्थिति में यही सत्य खोजा है कि चाहे राह कितनी भी कठिन क्यों न हो, जीवन का प्रवाह कभी थमता नहीं। यह संग्रह पाठकों को आत्ममंथन के साथ-साथ प्रेरणा भी देता है—कि ज़िंदगी हर हाल में “फिर भी चलती जाती है।”
फिर भी चलती जाए जिंदगी
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Author’s Name: प्रवीन कुमार
About the Author: प्रवीन कुमार, हरियाणा के सोनीपत ज़िले के गाँव नांगल खुर्द के निवासी हैं। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल से प्राप्त करने के पश्चात इन्होंने वर्ष 2012 में भगवान महावीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन में बी.टेक. की डिग्री हासिल की। इसके उपरान्त इन्होंने दीनबंधु छोटूराम यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से एम.टेक. की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2015 में आयकर विभाग में आयकर निरीक्षक के रूप में अपनी सेवा यात्रा शुरू की। जीवन के संघर्षों और अनुभवों ने इन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया। उनकी कविताएँ जीवन के उतार-चढ़ाव, अंतर्द्वंद्व और आशाओं का सजीव चित्रण करती हैं, और यही विश्वास व्यक्त करती हैं कि—“ज़िंदगी फिर भी चलती जाती है।
Book ISBN: 9798900815046
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