जो कुछ ज़िंदगी ने दिया और जो जमाने ने सिखाया उसमें से जो हृदय में उतर गया वह जब शब्दों में बँधा तो कभी वही भाषा की सरिता में बहता हुआ कविता हो गया। अपने को अभिव्यक्त करने का यह प्रयास आपके समक्ष इस विश्वास के साथ प्रस्तुत है कि कहीं किंचित् यह आपके हृदय और भावनाओं को क़रीब से छू देगा।
पंखुड़ियाँ
SKU: 9798898659813
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Author’s Name: Prem Swaroop Srivastav
About the Author: "मैं विज्ञान का छात्र और पेशे से चिकित्सक हूँ। यह दोनों बातें व्यक्ति को साहित्य से दूरी बढ़ाने को प्रोत्साहित करती हैं। किन्तु सहज कवि भाव से उबरना इतना आसान नहीं होता है। कई बार काव्यात्मक अभिव्यक्ति स्वतः उदित हो जाती है। अपनी कृति स्वयं को भाती ही है। तो लीजिए मैं कवि हूँ। समक्ष हूँ। Dr.Prem Swaroop Srivastavprof.pss@rediffmail.com"
Book ISBN: 9798898659813
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