हर खामोशी में एक पुकार छिपी होती है। “पुकार” वही आवाज़ है — भावनाओं, सवालों और सच्चाइयों की यात्रा, जो पन्ने पलटने के बाद भी दिल में गूंजती रहती है। दर्द की गहराई से लेकर उम्मीद की रोशनी तक, यह किताब आपको रुककर सोचने और अपने भीतर की आवाज़ सुनने के लिए आमंत्रित करती है। क्या आप इस पुकार को सुन पाएंगे?
पुकार
SKU: 9798900810683
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Author’s Name: शिवांगी सिंह
About the Author: शिवांगी पेशे से एक इंजीनियर हैं, लेकिन दिल से साहित्य और लेखन की ओर गहरा झुकाव रखती हैं। शब्दों के माध्यम से अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करना इन्हें हमेशा से प्रिय रहा है। ज़िंदगी और समाज को गहराई से देखने की दृष्टि इनके लेखन को खास बनाती है। इंजीनियरिंग की तार्किक सोच और लेखन की संवेदनशीलता का मेल शिवांगी के व्यक्तित्व को एक अनोखी पहचान देता है। यह उनकी पहली पुस्तक है, जो उनके सपनों और लेखन-यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
Book ISBN: 9798900810683
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