यह किताब कुछ उन पन्नो से मिल कर बनी है, जिन्हें जिंदगी के विविध पलों में कहीं भी लिखा गया। जिनमें दर्ज हैं कुछ बातें जिन्हें कह पाना लिखने से हमेशा ही कठीन रहा। हाँ इस किताब की हर लिखावट एक दूसरे से काफी अलग है और आपको हर बार एक अलग दिशा में ले जाती है। यह पन्ने उन डायरी का हिस्सा रहे हैं जो बीतते वक़्त के साथ अब पुराने हो चले हैं। इतने की जिनकी लिखावट की स्याही भी फीकी पड़ती चली जा रही है जैसे अनकहे विचारों की स्मृतियाँ समय के साथ धुँधली होती चली जाती हैं। यह किताब उन्हीं स्मृतियाँ को मिटने से बचाने और नई स्याही भरकर उन्हें फिर से जीवन देने का एक प्रयास है।
Author Details :
Author's Name: दीपशिखा
About the Author: इस किताब की लेखिका का संबंध उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से है, और पिछले कुछ वर्षों से वे बिहार के भागलपुर ज़िले में निवास कर रही हैं। शिक्षक शिक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात, वर्तमान में वह अपनी आगे की उच्च शिक्षा दिल्ली से प्राप्त कर रहीं हैं। कॉलेज के दिनों में ही उनका रुझान लेखन की ओर हुआ। प्रारम्भ में वे लघुकथाएँ लिखती थीं, परन्तु समय के साथ उन्होंने कविता लेखन भी प्रारम्भ किया। यह पुस्तक उनकी प्रकाशित रचनाओं का प्रथम संकलन है। वे मानती हैं कि हमारे आस-पास अनेक ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।प्रकृति-प्रेम उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। वे मानती हैं कि पर्वतों की शांत गोद और बहती नदियों का संगीत आत्मा को सबसे अधिक सुकून प्रदान करता है।
Book ISBN: 9789373149134
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