राकेश कुशवाहा ‘राही’ हिन्दी साहित्य के संवेदनशील एवं सशक्त स्वर हैं। आपने हिन्दी में परास्नातक उपाधि इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश से प्राप्त की। राही जी की अब तक कई काव्य कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें "नये चिराग", "महकते फूल लम्हें", "अक्ष", "साहित्य प्रेमी", एवं "सागरिका" प्रमुख हैं। आपकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों तथा प्रकृति की सौंदर्याभिव्यक्ति से ओतप्रोत होती हैं। आपको अक्ष सम्मान, अमृत कुंभ सम्मान सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। आप निरंतर साहित्य साधना में रत हैंi
नदी गुनगुनाती है
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Author’s Name: राकेश कुशवाहा राही
About the Author:"""नदी गुनगुनाती है"" काव्य संग्रह जीवन, प्रकृति और मानवीय भावनाओं का मधुर संगम है। इसमें कवि राकेश कुशवाहा ‘राही’ ने शब्दों के माध्यम से जीवन की बहती धारा, संघर्षों की गूंज और संवेदनाओं की मिठास को गहराई से अभिव्यक्त किया है। हर कविता पाठक को भीतर तक छूती है और उसे आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। संग्रह में नदी केवल जल की धारा नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रतीक है – कभी माँ, कभी साथी, तो कभी स्वयं कवि की अंतर्ध्वनि। यह संग्रह भावनाओं की गहराई में डुबकी लगाने का एक सुंदर अवसर है।"
Book ISBN: 9789372133127
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