यह संग्रह महज़ कविताएँ नहीं, बल्कि रिश्तों, आत्मखोज और प्रेम की उन यात्राओं का नक्शा है जिन्हें हम सब अपने भीतर कहीं न कहीं जीते हैं। ये कविताएँ जीवन को घटनाओं से आगे ले जाकर उन बारीक अहसासों तक पहुँचाती हैं, जहाँ हर चोट एक सीख बनती है और हर मिलन एक संभावना।इन कविताओं में प्रेम है, दूरी है, लौटने की चाह है और भीतर के सत्य से मिलने की ज़िद भी। यह किताब पाठक को ऐसा आईना देती है जिसमें वह अपने अनकहे भावों को पहचान सके।अगर आपने कभी किसी को चाहा है, खोया है या खुद को खोजा है— यह संग्रह आपके दिल के सबसे गहरे हिस्से को छू लेगा।
देह रुकी, मन बह चला
SKU: 9798900811420
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Author’s Name: रविकान्त राऊत
About the Author: रविकान्त राऊत संवेदनशील कवि और चिंतक हैं। ऊर्जा क्षेत्र में वरिष्ठ पद पर रहते हुए भी वे जीवन, रिश्तों और आत्मसंघर्ष के बारीक रंगों को गहराई से महसूस कर शब्द देते हैं। उनका मानना है कि कविता केवल पढ़ी नहीं जाती, जिया जाती है — और उनकी रचनाएँ पाठक को भीतर के सबसे सच्चे रूप तक ले जाती हैं।
Book ISBN: 9798900811420
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