“दूसरा किरदार” शेर, शायरी, ग़ज़ल और नज़्मों का एक एहसास भरा सफ़र है।कलमकार कर्ण ने इनमें उन भावनाओं को उतारने की कोशिश की हैजो कभी दिल में ठहर गईं, तो कभी ज़िंदगी के साथ बह चलीं।कभी मोहब्बत, कभी तन्हाई, कभी हौसला —हर रचना एक नए एहसास की झलक है,जो शायद आपके भीतर भी कहीं बसती हो।
दूसरा किरदार
SKU: 9781807152963
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Author’s Name: कलमकार कर्ण
About the Author: "क़लमकार कर्ण मानते हैं —“कौन भला तेरे किरदार को समझेगा, ख़ुद को जानेगा तभी असरदार निकलेगा। ”उन्होंने हाल ही में लिखना शुरू किया है और अपनी लेखनी के माध्यम से अपने भीतर के “दूसरे किरदार” को तलाश रहे हैं। कर्ण की रचनाएँ आत्मखोज, भावनाओं और जीवन के सच्चे अर्थ की खोज का प्रतिबिंब हैं। उनके शब्द पाठकों को भी खुद से मिलने की प्रेरणा देते हैं"
Book ISBN: 9781807152963
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