Description of the Book:
मैं नहीं जानता भावनाओं को किस तरह समझाया जाता है, मेरे पास इन कविताओं और अफ़्सानों के बारे में समझाने के लिए कुछ भी नहीं है, अगर वे खुद अपनी व्याख्या नहीं कर पा रहीं हैं। हालाँकि ये मेरे कुछ सबसे गहरे और अमूर्त एहसास हैं, जिनसे मैं अपने जीवन में गुज़रा हूँ। ये और बात है कि कुछ यहाँ मौजूद हैं, और कुछ नहीं हैं।
यह पुस्तक "तीखी आवाज़ें" विभिन्न काल्पनिक कविताओं और हमारे आसपास कहीं हो रही वास्तविक परिस्थितियों का मजमूआ है, बिखरते ज़माने और जज़्बातों का प्रतिबिंब है। ये किरदार उन्हीं समस्याओं और प्रलाप से गुज़र रहे हैं जो समाज में मौजूद हैं। वैसे तो ये कथात्मक कविताएँ आपको असहज कर सकती हैं, लेकिन यहीं पर आप समाज और आख्यानों का पुनर्निर्माण करते हो।
तीखी आवाज़ें
Author's Name: तुषार मौर्य About the Author: देहरादून शहर में रहने वाले 21 वर्षीय तुषार मौर्य (शार) एक नवोदित लेखक हैं। जो वर्तमान में अपनी आगे की पढ़ाई के रूप में साहित्य का अध्ययन कर रहे हैं। यह उनकी पहली पुस्तक है, जो कथात्मक और दार्शनिक कविताओं एवं गद्यो का संग्रह है। उन्होंने अपना आगे का जीवन कला के लिए समर्पित कर दिया है और वर्तमान में अपने गृहनगर में एक वृत्तचित्र फिल्म निर्माता के रूप में काम कर रहे हैं। आप लेखक से यहाँ संपर्क कर सकते हैं: ?tusharmourya2002@gmail.com Book ISBN: 9789357743457
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