Description of the Book:
चूल्हा और चौपाल, ऐसी कविताओं का संग्रह है जो दो अलग-अलग परिवेश को जीते हुए रची गई हैं. ऐसी कविताएं, जिनका जन्म एक द्वंद में हुआ है. घर से मिले संस्कारों के साथ, बड़े शहरों की चाल के समन्वय का द्वंद. रसोई के साथ, करियर के समन्वय का द्वंद. एक बेटी, बहु और पत्नी का पहले एक औरत होने का द्वंद. ये कविताएं एक पहल हैं, घर की दहलीज के भीतर सुलगते चूल्हे और दहलीज के पार रौब चलती चौपाल के समन्वय की.
चूल्हा और चौपाल
SKU: 9789395255554
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