ज़िंदगी अगर सवाल है, तो ज़िंदगी ही उसका जवाब भी है। बस महत्व केवल इस बात का होता है, कि परीक्षक तथा परीक्षार्थी का दृष्टिकोण, परीक्षा का दर्शन, किस दर्शन से करता है। हर किसी की जिंदगी के अनुभवों एवं यादों को सहेजकर, अगर शब्दों की माला बना ली जाए तो वह एक रंग बिरंगी एवं खुशबू से सराबोर और मंत्रमुक्त करने वाली होगी। प्रस्तुत संग्रह में मेरे द्वारा अपने अनुभवों को "चार लाइनों में, अल्फ़ाज़ ज़िंदगी के" द्वारा व्यक्त करने का प्रयास किया गया है। खामोशियां और दिल की उथल-पुथल के मध्य व्याप्त संवेदनशीलता को अनुभव द्वारा चार पंक्तियों में सजाने के प्रयत्न में सफलता तथा असफलता के पैमाने को मैं, पाठकों की आलोचनात्मक प्रतिक्रिया पर छोड़ता हूं।
चार लाइनों में
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Author’s Name: डा0 हरीश चन्द्र जोशी
About the Author: "डॉ हरीश चंद्र जोशी वर्तमान में राजकीय महाविद्यालय नैनीडांडा, पौड़ी गढ़वाल ,उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पूर्व में यह जवाहर नवोदय विद्यालय प्रयागराज, उत्तर प्रदेश तथा जवाहर नवोदय विद्यालय नैनीताल, उत्तराखंड में पीजीटी ( वाणिज्य) के पद पर 7 वर्षों तक सेवा कर चुके हैं। इनकी बुक लीफ पब्लिशिंग हाउस से इस पुस्तक के पूर्व दो पुस्तकें बस यूं ही, दिल की दिल से बातें तथा दो लाइनों में , फ़लसफ़ा ज़िंदगी का प्रकाशित हो चुकी हैं तथा वर्तमान पुस्तक चार लाइनों में, अल्फ़ाज़ ज़िंदगी के, इनकी तीसरी रचना है।"
Book ISBN: 9798900817347
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