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Description of the Book:

 

यह किताब जिसकी हर एक कविता मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि कुछ भाव है और कुछ वो लेख हैं जिन्हें पढ़के खुद भी आगे बढ़ने का साहस मिला , मैं उम्मीद करूंगी की जो भी यह पढ़े कुछ आनंद या सीख लेकर जाए । सांचे में ढल जाए यह सोच ऐसी गुमनाम नही बुझदिल से बागी बन जाए लफ्जों का है जाल यही

 

 

चेतना

₹50.00Price
  • Author Name : Dr. Ritika Gupta
    About the Author : मैने अपनी पढ़ाई CJM अंबाला से की है और फिर MBBS, MMIMSR mullana से। फिलहाल आगे की पढ़ाई और परीक्षाओं के लिए पढ़ाई कर रही हूं और साथ ही कैंटोनमेंट डिस्पेंसरी अंबाला में मेडिकल ऑफिसर की नौकरी भी कर रही हूं । कविताएं लिखने और पढ़ने का शौक बचपन से था मुझे। मेरे खयाल से शब्दों के खेल से कुछ नया हमेशा बनता, और कुछ शब्द कुछ कविताएं हमारी जिंदगी का एक अटूट हिस्सा बन जाते हैं । कभी कभी जिंदगी के रास्तों में एक प्रभावशाली कविता या गीत आगे बढ़ने की शक्ति देने के लिए बहुत होते हैं । सोचा तो यही था मैने की किसी एक विषय पे लिखूं जैसे सामाजिक विवाद या सिर्फ प्रेरित करना वाली कविताएं मगर कुछ एक दो आनंदित भाव में भी आ ही जाती हैं।
    Book ISBN : 9789394898578

     

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