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रचनाधर्मिता कोई साधारण कार्य नहीं, सूखे फूलों में फिर से नई ताज़गी लाने जैसा असाधारण कार्य है ।यह पुस्तक भी जीवनानुभवों और उससे संबंधित अनुभूतियों का समन्वय है। अपने आस-पास की घटनाओं से प्रभावित हुए बिना सामाजिक सरोकारों से नहीं जुड़ा जा सकता है इसीलिए इस काव्य संग्रह में विविध रंगों का वैविध्य पूर्ण चित्रण देखने को मिलेगा।प्रेम, करूणा, गंभीर चिंतन,नए विमर्श आदि से जुड़ता यह काव्य संग्रह आप सभी के समक्ष नये रंग रूप और आकर्षक कलेवर में प्रस्तुत है। हमेशा की तरह इस संग्रह को भी आप सभी का स्नेह प्राप्त होगा ।इसी अभिलाषा के साथ...                           डॉ उपासना दीक्षित

गुज़ारिश यही कि तुम पढ़ना

SKU: 9798898655853
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  • Author’s Name: डॉ उपासना दीक्षित

    About the Author: "नाम - डॉ. उपासना दीक्षित विभाग इंग्राहम इंस्टीट्यूट गर्ल्स डिग्री कॉलेज गाजियाबाद उ. प्र.शिक्षा - एम. ए. हिन्दी, एम. ए. शिक्षा शास्त्र, बी.एड, पी. एच. डी. (हिन्दी) एम.ए. भगवद्गीता (अध्ययन रत)शोध विषय - धूमिल की कविता में युग चेतनाविभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशन और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक आयोजनों में सहभागिता प्रकाशित पुस्तकें - मन के मोती, मन अनमना सा है, मेरे मन का चांद,मन तो सच्चा है जी, धूमिल की कविता में युग चेतना , कुछ तुमने कहा प्रकाशाधीन - शब्द सांवरे, बर्फ के फूल"

    Book ISBN: 9798898655853

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