Description of the Book:
यूँ तो हर कविता मेरे दिल के बहुत क़रीब है, पर “सात जन्म का साथ” मेरी सबसे प्रिय कविता है जिसमें मेरे अनुमान से एक इंसान सातों जन्म एक ही बार इस धरती पर आने से लेकर जाने तक जी लेता है।
कविताओं के संग्रह "गहराइयाँ " की हर कविता मेरी निजी ज़िंदगी के किसी पहलू से जुड़ी है। अंतर्मन में उभरते ख़्याल, मुस्कुराने से लेकर तन्हाई तक, कुछ ही पलों में कविता के रूप में एकत्रित होते चले गए। हर कविता में कहीं न कहीं आप भी अपने जीवन का एक हिस्सा महसूस करेंगे।
कुछ कविताएँ बचपन से लेकर वरिष्ठ होने तक के सफ़र से जुड़ी हैं और कुछ ऐसी हैं जो सामाजिक कारणों पर आधारित हैं। हमारा पर्यावरण मेरे दिल के बहुत क़रीब है “आओ अपना फर्ज़ निभाएँ” उसी पर आधारित है। परिवार व दोस्तों से सम्बन्ध संजोए रखना भी एक आधार है मेरे कविता लेखन का।
“गहराइयाँ” से शुरू हुआ मेरा सफ़र अभी जारी है। अगला संग्रह आने की भी तैयारी है।
गहराइयाँ
Author's Name: Achla Baveja About the Author: कहते हैं धरोहर में पिता से बहुत कुछ मिलता है पर माँ से जो मिले वह भी बहुत खूब खिलता है मुझे गर्व है अपनी माँ के कविता लेखन पर जिनसे पाई मैंने यह धरोहर सोचा न था कि मैं इतना लिख पाऊँगी कि एक दिन अपनी किताब की रूपरेखा बनाऊँगी स्कूल में पढ़ाती थी, छोटे बच्चों के लिए छोटी छोटी कविता बनाती थी ५१ की हुई तो स्कूल में पढ़ाना छोड़ दिया कलात्मक कृतियों से अपना नाता जोड़ लिया पिछले ८ वर्ष से हाथ में सदा रहते काग़ज़ कलम और रंग मण्डला, परम्परागत व अन्य कई प्रकार की चित्रकारी में लग गया हमारा मन एक दिन बैठी थी समय बिताने को ख़ाली बस काग़ज़ क़लम उठा कर एक कविता लिख डाली उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा जब मन चाहे खींच दी शब्दों की रूपरेखा उन्हीं में से कुछ कविताएँ पेश कर रही हूँ बची हुई भी एकत्रित कर अपने पिटारे में धर रही हूँ मिलता रहा अगर आप सभी का प्यार तो अपनी कविताएँ साझा करती रहूँगी बारम्बार। आपकी रचनात्मक सखी अचला बवेजा Book ISBN: 9789358730838
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