Description of the Book:
खयाल तो अविरल होते हैं, बहते रहते हैं। बस उन्हीं में से कुछ को समेट कर इस कविता संग्रह में कुछ हिंदी, कुछ उर्दू में लिखा है मैंने।
ये सारी कविताएं अलग अलग भावों से सजा संवेदनाओं का एक पिटारा है जो मेरे दिल के बेहद करीब है। मेरे मन में कोई भी भावना आती, तो मैं उसे एक कविता का रूप दे देती।
बस एसी ही कुछ छोटी बड़ी, ऋतुओं, स्पंदनों, प्रेम और प्रकृति, स्वावलंबन जैसे विषयों के किनारों को छूती हुई मेरे खयालों की नदी है जो मुझसे उद्गम हो आपतक बह निकली है। आशा है आप इसे पढ़कर इससे जुड़ा महसूस करेंगे और अपने आप से जुड़ पाएंगे।
– मोहिनी भांडारे।
ख़्याल
SKU: 9789395314435
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Author's Name: Mohini Bhandare About the Author: मैं एक साधारण महाराष्ट्रीय लड़की, एक घर की बड़ी बेटी हूं। बचपन से युवावस्था तक खुद की खोज में ही हूं। इस यात्रा में लेखन ने मेरा भरपूर साथ दिया। मैने अपनी पहली गज़ल सातवीं कक्षा में लिखी थी। तब से लेकर आजतक जब भी मेरे अंदर कोई तीव्र भावना उठती, तो उससे मैं कविताओं का सृजन करती। सोलह साल की रही होऊंगी, एक दिन मेरी दादीजी ने मुझे गूढ़ तल्लीनता से कुछ लिखते हुए देखा। उन्होंने पूछा कि मैं क्या लिख रही थी? मैने उन्हे अपनी कविता दिखा दी। उन्होने बड़ा खुश होते हुए कहा, ये कविताएं छपवाती क्यों नही? काफी अच्छा लिखती हो। बस फिर, वो बात मुझे मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार लगी। फिर पढ़ाई में ध्यान देते देते कविता लिखना परस्पर चलता रहा। कुछ राइटिंग साइट्स पर लिखा, कुछ ब्लॉग शुरू किए, पर प्रेरणा गायब ही रही। फिर bookleaf publishing के write-a-thon के बारे में सुना। और आजतक लिखी सारी कविताओं को यहां पिरो दिया। धन्यवाद। – मोहिनी भांडारे। ISBN: 9789395314435
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