Description of the Book:
नादान ही अच्छे थे… जब उम्र बढ़ने लगती है, ये शब्द गहरे, और गहरे होते जाते हैं। पढ़ने वाला और लिखने वाला दोनों ही इन शब्दों को दिल से पुकारते हैं… नादान ही अच्छे थे। यह पुस्तक सरल कविताओं और तुकबंदियों' का संग्रह है| जो खुशी, दुःख, वेदना और प्रेम आदि के विषयों को छूती है। अपने अंधेरे कमरे में अकेले बैठा हुआ, शून्य में घूरता हुआ कोई, कोई बगीचे में बच्चों को खेलते देख, अपने बचपन, अपने अतीत को याद करता हुआ—यह पुस्तक जीवन के ऐसे कई पहलुओं को दर्शाती है। इसमें आपको अपने जीवन के अंश मिलेंगे। यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जो भीड़ में अकेला महसूस करते हैं, जो खुद से प्रेम करना चाहते हैं। "कुछ फ़ैसले, कुछ फ़ासले"—इस पुस्तक को पढ़कर अपने जीवन में रौशनी लाने का निमंत्रण…स्वीकार करें।
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SKU: 9789363311329
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