मनुष्य के दिमाग़ और दिल के बीच कई तरह की उलझने और विचार कौंधते रहते हैं| या तो उन उलझनों के बीच उलझा जाए या जो वो विचार हैं उनको एक ढाल बना कर, किसी काग़ज़ पे बस यूँ ही लिख दिया जाए| अच्छा या बुरा लगने की कोई बात उस लिखावट मे नहीं है| बस वो एक दिमागी उपज है, जो ना जाने कितनो के मन में आते होंगे, पर बेवजह ही मन-मस्तिष्कको कचोटते हैं| उन्ही विचारों की उपज है ये..एक वजह लिए बेवजह के ख़याल|
कुछ लिख कर देखते हैं
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