Description of the Book:
कहते हैं, "कविता उनकी नहीं होती है, जो लिखते हैं। कविता उनकी होती है जिन्हे वो सुनने की ज़रुरत होती है!" बस इसलिये लिखते हैं हम – ताकि किसी को हसा सकें, समझा सकें, बता सकें। ये किताब मैंने पैसे या प्यार के लिए नहीं, सुकून के लिए लिखी है। किसी सुहाने मौसम में जो कमाल एक गरम चाय और रफी के गाने करते हैं, उम्मीद है ये किताब भी वही काम करे।
इसमे हर उस विषय पे कविता लिखने की कोशिश की है मैंने, जिस पर हम रोज मरहा की जिंदगी में बात करना चाहते हैं, उन चिजो से गुजरते है। ये मेरी पहली किताब है और मैंने मेरी समझ से जितनी दुनिया देखी है, उससे ये किताब लिखी है।
"ये मेरी उनसे तुलना नहीं है की मेरा उपनाम उनके नाम सा केह लाए,
उस गांडीव धारी के सारथी जैसा, बस इतनी आशा है, की ये 'कन्हैया' आपकी मदद कर पाए!"
कन्हैया
SKU: 9789395620116
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Author Name: Kaushal Saboo About the Author: मेरा नाम कौशल साबू। पेशे से एक कंप्यूटर इंजीनियर हूं और मिजाज से कवि। मेरे परिवार में साहित्य से कोई जुड़ा नहीं है, इसलिये मैं अपने इस लिखने की काबिलियत को भगवान का दिया तौफा मानता हूं और वोही लिखता हूं जो दिल में हो। बचपन से पौराणिक कथाओ से काफ़ी प्रेरित रहा हूं, जब भी उन्हे सुनता या पढता था तो उन में खुदको या खुद के जवाब को ढूंढ़ने की कोशिश करता और अक्सर वो मिल जाते थे। मैं मेरी कविताओं के माध्यम से वही कोशिश करता हूं की उन पौराणिक पात्रों को हमारे-आपके जीवन से जोडके उन्हे बताऊ। मेरे हिसाब से आदमी प्यार में हारने से नहीं डरेगा, जब वो जानेगा की कृष्ण भगवान खुद प्यार में हारे हो, वो चुनौतियो से नहीं घबरायेगा जब वो कर्ण-अभिमन्यु की कहानी सुनेगा, और वो परिवार का असली अर्थ समझेगा , जब वो महादेव को जानेगा। मैंने हमेशा अपनी जिंदगी एक ही मंत्र से जीने की कोशिश की है - "अपना सर मत झुकाना, और किसी दूसरे का दिल मत दुखाना।" मेरे नज़रिये में ज़िंदगी की ख़ूबसूरती ही ये है की वो कठिन है। तो हमें बस इस सफर का लुफ्त उठाना चाहिए। मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हु, की आपने मेरी किताब पढ़ी । आशा करता हूं आपको पसंद आयी हो। आप मुझे इस ईमेल आईडी से संपर्क कर सकते हैं – thedeltaproduction.16@gmail.com "गिरे, संभले, टूटे, रुके, कटे, जुडे, तब जाके बने हैं, जब शुरू किया था तब पौधे थे, आज खड़े बनकर पेड़ घने हैं!" धन्यावाद! Book ISBN: 9789395620116
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