Description of the Book:
एक हाँ अपने लिए ! लिखने का शौक मुझे मेरी माँ से विरासत में मिला है , उनकी एक किताब को पलटते हुये मैंने पढ़ा "एक हाँ अपने लिए" और बस...उस वक़्त एहसास हुआ के , मैं किसी को ना नहीं बोल पा रही हूँ , शायद मुझे ना बोलना भी नहीं आता ! पर आज ये किताब प्रकाशित करके में कह रही हूँ वो "एक हाँ अपने लिए"! ये किताब उन कविता का समूह हैं जो मैं बचपन से लिखती आई हूँ! जब कोई साथी ना था , इन्होने मेरा साथ निभाया! दोस्त ज़रूर थे , पर इन पन्नों ने दोस्ती निभाई ! तो अगर आपको भी लग रहा हैं , तो कर ले हिम्मत हार ज़रूर होगी , पर हार ना मानने के लिए आज ही हैं सही वक़्त कह दो वो एक हाँ अपने लिए !!
एक हाँ अपने लिए
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