आँखों के पीछे कहीं _एक ऐसी दुनिया के भाव और शब्द हैं जिसे जाने अनजाने हम सब अपने मन मस्तिष्क में जीते हैं। दुनिया के किसी भी कैमरे से अधिक जीवंत चित्र हमारी आंखे खींचती हैं और उन्हें चिर काल तक सुरक्षित भी रखती हैं। ताकि हम उन्हीं भावनाओं के साथ उन पलों को जी पायें। उन लोगो की यादों को ज़िंदा रख पायें जिनके साथ हमने अपने जीवन के अलग अलग़ हिस्सों को अलग अलग समय पर जिया है। उन्हीं यादों और भावों का शब्दरूप है ____आँखों के पीछे कहीं।
आंखों के पीछे कहीं
Author’s Name: पीरू मस्ताना
About the Author: पीरू मस्ताना,अपनी पिछली किताब[ मैं याद रखूँगा ] से सभी भावपूरित हृदयों की सेवा कर चुका है। एक बार फिर मैं आप सबके लिए भावों की उसी यात्रा का अगला पड़ाव लेकर हाज़िर हूँ और अपेक्षा करता हूँ कि आप इस राह पर मेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलेंगे।
Book ISBN: 9798900810324
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