Description of the Book:
कह सकता हूँ कि पढ़िये इसमें भी प्यार मोहब्बत, दुःख दर्द, तड़प बिछड़न वाली कविताएँ हैं। पर ऐसा है नहीं। इस किताब में कविताएँ, असल में, हैं ही नहीं।
दिमाग जो मशीन की तरह लगातार, हर वक़्त चलता रहता है उससे रिसने वाले धुएँ और कालिख को कागज़ पर उतार दिया है। अब आप चाहो तो इसे कविता कह सकते हो।
पर ये कविताएँ हैं नहीं। ये कुछ और हैं। शायद...
अंत बनाम समाप्त!
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