अंतर्मन जीवन के उन अनकहे पलों का संग्रह है, जो हमें हँसाते, रुलाते और सोचने पर मजबूर करते हैं। एक गृहिणी की कलम से निकली ये कविताएँ, रिश्तों की मिठास और अकेलेपन की खामोशी से लेकर, सपनों की उड़ान और जीवन के संघर्षों तक का सफर तय करती हैं। "अंतर्मन" उन सभी के लिए है, जो साधारण में असाधारण को देखते हैं और अपने दिल की आवाज़ सुनना चाहते हैं।
अंतर्मन
SKU: 9798898659363
₹110.00Price
Author’s Name: Shivani JaiRaj
About the Author: शिवानी, उत्तर प्रदेश के शामली की एक प्रतिभाशाली कवयित्री हैं। एक गृहिणी के रूप में, उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और आसपास की भावनाओं को अपनी कविताओं में उतारा है। उनकी रचनाओं में घरेलू जीवन की सच्चाइयों, संघर्षों और संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख कविताएँ, जैसे 'पीहर', 'बेटियाँ', 'चार लोग' और 'हारी नहीं हूँ मैं', पाठकों को गहराई से छूती हैं। शिवानी की लेखनी में सादगी, आत्मीयता और जीवन की गहरी समझ का अद्भुत मेल है। अपनी कविताओं से उन्होंने कई महिलाओं को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रेरणा भी दी है।
Book ISBN: 9798898659363
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