"अंतर्मन पीडा़ ही अंतर्मन पुस्तक का आधार है। यह पुस्तक यथार्थ और सत्य के बीच अंतर को स्पष्ट करती है और समाज में व्याप्त विसंगतियों को उद्घाटित करती है। साथ ही अपील करती है कि हमें गलत को ग़लत कहने की सामर्थ्य रखनी चाहिए। लेखक ने समाजिक जीवन में रहते हुए जिन तकलीफों व विसंगतियों को महसूस किया है, वैसा ही इस पुस्तक में लिख दिया है। एक संवेदनशील मन जो भी महसूस करता है, उसके उद्गार इस पुस्तक में समाहित है।
इस पुस्तक में लेखक की प्रमुख इक्यावन (51) कविताओं का यह संग्रह यथार्थवादी दृष्टिकोण रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है।"
अंतर्मन की संवेदना
Author’s Name: Dr Rajnish Kumar Pandey
About the Author: "डॉ रजनीश कुमार पाण्डेय ओजस्वी शिक्षक- केंद्रीय विद्यालय संगठन शिक्षा - M.Sc, M.Phil, Ph.D, B.Ed.NCERT परामर्शदाता (मनोदर्पण) भारत सरकार शिक्षा मंत्रालय। डॉ रजनीश, सहज और संवेदनशील व्यक्तित्व हैं। वह समाजिक और राष्ट्रीय कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। डॉ रजनीश पर्यावरण जीव विज्ञान विषय से डाक्टर आफ फिलासफी (Ph.D) हैं तथा विज्ञान शिक्षक हैं। वह विज्ञान विषय के साथ -साथ हिंदी विधा में संवेदनशील व यथार्थ परक कविताएं व लेख लिखते हैं तथा विंध्य क्षेत्र के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक हैं। आपने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनेक प्रयत्न किये हैं।डॉ रजनीश का मानना है कि हमारी कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। यह अंतर उन्हें जहां भी जिस रूप में दिखता है, वह उसके विरुद्ध आवाज जरूर उठाते हैं।"
Book ISBN: 9781807150167
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