Description of the Book:
यूँ तो मोहब्बत को पढ़ना और मोहब्बत में पड़ना एक दूसरे से बहुत अलग हैं लेकिन दिल को सुकून दोनों में ही मिलता है। वो अलग बात है कि इन दोनों से बढ़कर भी अगर कुछ समझें तो मोहब्बत में पड़कर मोहब्बत को पढ़ना है। शायद इश्क़ की तालीम तो आपको न दे सकूँ लेकिन अपने बिख़रे हुए अलफ़ाज़ आप तक पहुंचा कर आपका इससे तार्रुफ़ तो करवा ही दूंगा।
अभी बाकी है का ये संकलन तकनीकी तौर पर कविताओं और ग़ज़लों को प्रस्तुत करने में बेशक़ सक्षम न हो मगर कोशिश पूरी रहेगी कि आपके दिलों तक पहुँच सकूँ और मोहब्बत का एक राग वहां भी छेड़ सकूँ। ये कवितायेँ सिर्फ अल्फ़ाज़ नहीं बल्कि मेरे जज़्बात हैं। ये वो इश्क़ है जो मैंने किया तो बहुत मगर कभी ज़िक्र नहीं किया। हालाँकि ये अलग बात है कि मोहब्बत की परिभाषा न मैं कल लिख सकता था न आज। और मेरी मानें तो मोहब्बत को शब्दों में बयां कौन कर सकता है? ये तो वो दरिया है जिसमें उतरेंगे तभी समझेंगे। उम्मीद करता हूँ कि किताब पढ़ने के बाद आपका इसमें डूबने का मन ज़रूर हो और यही मेरा लक्ष्य भी है।
क्योंकि बात सिर्फ इतनी है कि "मेरे दिल में उनकी याद अभी बाक़ी है, मुलाक़ात के कुछ ख़्वाब अभी बाक़ी हैं"
अभी बाकी है...
Author's Name: सौरभ थपलियाल About the Author: कविताओं और साहित्य की दुनिया में हाल ही में कदम रखने वाले सौरभ थपलियाल का जन्म दिल्ली प्रदेश के उत्तर-पूर्वी जिले के भजनपुरा नामक स्थान पर 30 नवंबर सन् १९९३ को हुआ था। विचारों को शब्दों में उखेरने की तीव्र इच्छा जब मन में हिलोरे लेने लगी तो इन्होनें आगे बढ़कर सन् २०२२ में पहली अपनी पुस्तक "द बबल ऑफ़ हेट एंड कम्युनल डिफरेंसेस" प्रकाशित की। हालांकि इससे पहले ये अपनी काव्य रचनायें कुछ सामूहिक संकलनों में भी प्रकाशित करवा चुके हैं। इनका विचार है - "आप क्या बोलते हैं से अधिक महत्वपूर्ण है कि आप अपनी बात को कैसे व्यक्त करते हैं" और इसी सिद्धांत के साथ ये दूसरों के साथ परस्पर सम्बन्ध भी स्थापित करना पसंद करते हैं। Book ISBN: 9789357218399
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