Description of the Book:
"'अब तू अंधकार का आभार व्यक्त कर '
मनीषा केशव कि कविताओं के इस मार्मिक और शक्तिशाली संग्रह में, लेखिका मानवीय अनुभव के अशांत जल में आगे बढ़ते हुए रूपांतरित और विजयी होकर उभरती है। अडिग ईमानदारी और भेद्यता के साथ, छाया का सामना करती है, और ऐसा करते हुए, मानवीय आत्मा के लचीलेपन की खोज करती है। गीतात्मक भाषा और विचारोत्तेजक कल्पना के माध्यम से, वो यहाँ पाठकों को आत्म-खोज, उपचार और अंततः, मानवीय आत्मा के विजय की एक परिवर्तनकारी यात्रा पर ले जाती है।
अंत में कहती है :
""जो अपने जज्बे से,अंधकार समक्ष झुककर जंग जीत गया
वो खुद्दार, अब खुद कि नजर में, ' खुशनसीब ' बन गया.""आभार."
अब तू अंधकार का आभार व्यक्त कर-कृतज्ञता अर्पण
SKU: 9789369546862
₹110.00Price
Author's Name: Manisha keshav
About the Author: "मनीषा केशव अपनी कलम से बहती पंक्तियों के प्रकाश को ईश्वरीय कृपा मानती है. अपने दैनिक, जागतिक, आध्यात्मिक और पारलौकिक अनुभव को शब्द में पिरोकर कागज पे उतारती है. सृष्टि कि दिव्य चमक कि हाजरी में,कलम को अविरत अनुष्ठान कराती है, कलम से अवतरित बहता पुण्य प्रवाह,सृष्टि में बाँट देती है ऐसे ब्रह्माण्ड और धरती मध्य सशक्त माध्यम बनकर कर्म करती है.मनीषा केशव Bookleaf publishing के साथ सहयोग से अपने निम्नलिखित 4 काव्यसंग्रह प्रकाशित कर चुकी है :1.'समझ सको तो अर्थ हूँ, ना समझो तो व्यर्थ हूँ 'Award winner2.'ये मेरी और मेरे मालिक कि अंतरंग गुफ़्तगू है 'Award winner3.'तू अभी भी लाजवाब है '4.'अब तू अंधकार का आभार व्यक्त कर 'आभार." Book ISBN: 9789369546862
.png)
