"अनकही यादृच्छिक रूप से
ही कही गयी है, कुछ सोच समझ कर नहीं
बस जो मन में आया बात बेबात लिखते गए ,और बस
कह ही दी गयी अनकही :-)
सुनोगे ना ?"
अनकही
SKU: 9781807154059
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Author’s Name: कीर्ति प्रसाद 'आरोही '
About the Author: "कीर्ति प्रसाद ' आरोही बैंक ऑफ़ इंडिया में वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैंIउन्हें कवितायेँ लिखना काफी पसंद है Iवे हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओँ में लिखती हैं Iउनकी एक अंग्रेजी कविता I Was Asked Poetry Society Of India के काव्य संकलन 'The Blooming Buds' में प्रकाशित हुई थी जब वे ग्यारवी कक्षा में थीं I पहले सिर्फ कविताएं और अब काव्य संकलन भी -'अनकही' और उस से पहले 'कुछ विहान सा और अंग्रेज़ी में 'A FISTFUL OF SKY' "
Book ISBN: 9781807154059
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