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इस किताब में एक ढोली जाती  के व्यक्ति की जीवनी हे उसके संगर्ष की गाथा हे और ढोली जाती जो की राजस्थान की अनुसूचित जाती में आती हे उसका इतिहास या उसके बारे में बहुत अधिक नहीं लिखा गया हे।  ढोली जाती के यक्ति द्वारा लिखी गयी ये अपने आप में पहली जीवनी हे।  भंवरलाल गुरावा आज दुनिया में नहीं हे परन्तु वो अपने संगर्ष की गाथा लिख के गए जिसको उनकी पुत्री डॉ अंजू गुरावा ने सम्पादित किया हे इसमें उनके बचपन से ले कर सम्पूर्ण जीवन की गाथा हे। 

अछूत प्रिंसिपल की जीवनी

SKU: 9789373142173
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  • Author’s Name: भंवर लाल गुरावा

    About the Author: मेरा नाम भंवर लाल गुरावा हे। मेरा जन्म 1930 में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में, ढोली जाति में हुआ, जिसे समाज में नीच समझा जाता था। मैंने उच्च शिक्षा प्राप्त की औरप्रिंसिपल के पद तक पहुंचा। जातिवाद के उस घृणित रूप को गहराई से समझा, जो व्यक्ति की इंसानियत को मार देता ।जाति व्यवस्था एक ऐसी कला है जो इंसान का पराक्रम, साहस और जिज्ञासा छीनकर उसे गुलाम बना देती है। मैंने 1936 से 1946 तक के अपने जीवन में इस देश के बहुत बड़े नुकसान को करीब से देखा और जाना और उसका चिट्टा मेने इस जीवनी में लिखा। निश्चित रूप से ये जीवनी समाज में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में जानी जाएगी।

    Book ISBN: 9789373142173

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